उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा से जुड़े छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड मदरसा बोर्ड ने मुंशी, मौलवी, आलिम अरबी और आलिम फारसी परीक्षाओं का परिणाम घोषित कर दिया है। इस बार का परीक्षा परिणाम काफी उत्साहजनक रहा, जिसमें कुल 92.27 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल हुए। खास बात यह रही कि इस परीक्षा में बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बाजी मारी है।
मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती समून कासमी के अनुसार, इस वर्ष कुल 261 परीक्षार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। इनमें से 244 छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण हुए, जबकि 17 परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण रहे। विभिन्न पाठ्यक्रमों में परीक्षार्थियों की संख्या अलग-अलग रही। मुंशी में 83, मौलवी में 226 और आलिम अरबी-फारसी में 99 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से निर्धारित संख्या में विद्यार्थियों ने परीक्षा दी।
परिणामों की बात करें तो मुंशी वर्ग में सानिया प्रवीन ने 66 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनके बाद फौजिया ने 64 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि मोहम्मद रिजवान ने 60.60 प्रतिशत अंकों के साथ अच्छा प्रदर्शन किया।
मौलवी वर्ग में भी छात्राओं का दबदबा देखने को मिला। ऊधमसिंह नगर की शरीफा ने 78 प्रतिशत अंक प्राप्त कर शीर्ष स्थान हासिल किया। वहीं हरिद्वार की नाजिया ने 77.50 प्रतिशत अंक प्राप्त किए और उसी जिले की रिदा जेहरा ने 75.60 प्रतिशत अंक लेकर दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया।
आलिम अरबी वर्ग में मुस्कान ने 78 प्रतिशत अंक के साथ पहला स्थान प्राप्त किया। काशीफा ने 75.8 प्रतिशत अंक हासिल किए, जबकि अरिशा और सायबा दोनों ने 75.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसी तरह आलिम फारसी वर्ग में भी मुस्कान ने 79 प्रतिशत अंक प्राप्त कर टॉप किया। अलीशा ने 71 प्रतिशत और साहिबा अली ने 70.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
इस वर्ष के परिणामों में यह साफ तौर पर देखा गया कि छात्राओं ने हर वर्ग में बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। यह न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य की ओर भी संकेत करता है।
मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही उन्होंने कहा कि जो छात्र इस बार सफल नहीं हो सके हैं, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि आगे और बेहतर तैयारी के साथ सफलता हासिल करनी चाहिए।
कुल मिलाकर, इस बार का परिणाम न केवल संतोषजनक रहा, बल्कि यह भी साबित करता है कि उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा का स्तर लगातार बेहतर हो रहा है और छात्र-छात्राएं शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।

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