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बहुराष्ट्रीय FMCG कंपनी पर लगा 3 लाख का जुर्माना निरस्त, ‘महा वैल्यू’ को झूठा-भ्रामक संदेश साबित नहीं कर पाया अभियोजन

नैनीताल हाईकोर्ट ने कहा कि लोक विश्लेषक की रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ‘महा वैल्यू’ शब्द किस प्रकार भ्रामक या झूठा है

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पेप्सिको इंडिया के पैकेज्ड खाद्य उत्पाद पर ‘महा वैल्यू’ लिखे जाने को मात्र इसी आधार पर मिसब्रांडिंग नहीं माना है. हाईकोर्ट ने पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड पर लगाया गया 3 लाख रुपये का जुर्माना निरस्त कर दिया है. न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की एकलपीठ ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में विफल रहा कि पैकेट पर लिखा गया ‘महा वैल्यू’ उपभोक्ताओं को किसी प्रकार का झूठा या भ्रामक संदेश देता है.

पेप्सिको इंडिया को नैनीताल हाईकोर्ट से बड़ी राहत: विवाद वर्ष 2015 का है, जब पौड़ी गढ़वाल में खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने एक दुकान से लहर आलू भुजिया के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे थे. लोक विश्लेषक ने अपनी रिपोर्ट में केवल यह कहा कि पैकेट के कोने पर ‘महा वैल्यू’ लिखा होने के कारण उत्पाद फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत मिसब्रांडेड है. इसके आधार पर निर्णायक अधिकारी ने पेप्सिको इंडिया और निर्माता कंपनी पर 1.5-1.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसे बाद में फूड सेफ्टी अपीलीय अधिकरण ने भी बरकरार रखा.

पैकेज्ड खाद्य उत्पाद पर ‘महा वैल्यू’ लिखे जाने को मिसब्रांडिंग नहीं माना गया: हाईकोर्ट ने कहा कि लोक विश्लेषक की रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ‘महा वैल्यू’ शब्द किस प्रकार भ्रामक या झूठा है. रिपोर्ट में केवल कानून की धाराओं का उल्लेख कर दिया गया, लेकिन यह नहीं बताया गया कि उपभोक्ता किस प्रकार गुमराह हो सकता है. न्यायालय ने कहा कि बिना ठोस कारण और विश्लेषण के किसी उत्पाद को मिसब्रांडेड नहीं ठहराया जा सकता.

‘महा वैल्यू’ को गलत नहीं ठहाराया जा सका: अदालत ने माना कि कंपनी ने शुरू से यह स्पष्ट किया था कि ‘महा वैल्यू’ का संबंध उत्पाद की मात्रा से है, गुणवत्ता से नहीं. यह उपभोक्ताओं को यह बताने के लिए लिखा गया था कि पैकेज अधिक मात्रा वाला वैल्यू पैक है तथा यह लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम और उससे संबंधित नियमों के अनुरूप है. इस दलील पर न तो निर्णायक अधिकारी और न ही अपीलीय अधिकरण ने उचित विचार किया.

हाईकोर्ट ने पेप्सिको इंडिया पर लगाया गया जुर्माना निरस्त किया: इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने 31 मई 2024 को फूड सेफ्टी अपीलीय अधिकरण तथा 21 दिसंबर 2018 को निर्णायक अधिकारी द्वारा पारित दोनों आदेशों को निरस्त करते हुए पेप्सिको इंडिया की अपील स्वीकार कर ली और उस पर लगाया गया जुर्माना पूरी तरह समाप्त कर दिया.

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